Pahad की संवेनदशीलता
अबकी बार रोये हैं पहाड़
बादलों ने निभाई शत्रुता
वर्षा ने तोड़े संस्कार
धरती भी रोई हजार बार
अबकी बार रोये हैं पहाड़
सुरलोक सी सुगंध बसती थी जहाँ
फ्यूंलड़ी फूल खिलते थे जहाँ
बांज बुरांस भी इठलाता था जहाँ
बांसुरी मोच्छन्ग स्वर गुनगुनाता था जहाँ
वीरान उदास निराश है पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
यूँ तो जीवन देतें हैं बादल
पर जब जीवन ही लील ले बादल
गाँव के गाँव खो जाएँ वजूद
जीवन की धड़कन ना हो मोजूद
ठगा है मानव ठगें हैं पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
स्वप्न सजीले नैनो में उमड़े
फिर गुम गए इन्ही नैनो में
मूंदे नैनो में भी थी अभिलाषा
जीने की तड़प मन में आशा
छटपटाती देह , निरीह था पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
बादलों ने निभाई शत्रुता
वर्षा ने तोड़े संस्कार
धरती भी रोई हजार बार
अबकी बार रोये हैं पहाड़
सुरलोक सी सुगंध बसती थी जहाँ
फ्यूंलड़ी फूल खिलते थे जहाँ
बांज बुरांस भी इठलाता था जहाँ
बांसुरी मोच्छन्ग स्वर गुनगुनाता था जहाँ
वीरान उदास निराश है पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
यूँ तो जीवन देतें हैं बादल
पर जब जीवन ही लील ले बादल
गाँव के गाँव खो जाएँ वजूद
जीवन की धड़कन ना हो मोजूद
ठगा है मानव ठगें हैं पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
स्वप्न सजीले नैनो में उमड़े
फिर गुम गए इन्ही नैनो में
मूंदे नैनो में भी थी अभिलाषा
जीने की तड़प मन में आशा
छटपटाती देह , निरीह था पहाड़
अबकी बार रोये हैं पहाड़
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