कल दिनांक २० /१० ?१३ को जिजीविषा लेडीज क्लब द्वारा खुशनुमा शामे गजल का कार्यक्रम हुआ अच्हा लगा पैहली बार गजल गाई। कुछ हिचकिचाहट भी थी पर फ़िरशुभचिंतकों की हौसलाफजाई पर गजल पढ़ी सब को अछी लगी मलिकाए तरनुम का ख़िताब भी मिला। डौली डबराल मेहनत से कार्यक्रम को सफल बनाती हैं। उर्म के इस पड़ाव पर जब समाज क्या बोलेगा सोचने में ही चला जाता है डॉली जी हर नई चीज को अपनाने में गुरेज नहीं करती उन्ही के ड्रैस कोड की वजह से मैंने अनारकली सूट पेहना एक बार लगा क्या फालतू का शॉ क है इस उम्र में ये क्या बात ठीक है फिर लगा सारी जिन्दगी ये करूँ न, करूँ में कट गई। हम अपने मन को समाज के आइने से देखतें हैं पर समाज भी तो हमसे ही बनता है। हम कुछ ऐसा करें की हम अपने मन की भी सुने और समाज को भी अछा दें ,हमारे कृत्य समाज के कल्याण को आगें बढ़ाएं। कार्यक्रम में एक पुरानी परिचिता बोली आज तुम छा रही हो, दरसल हमेशा साडी में देखने के आदी लोगो को कुछ नवीन लगा किसी उम्रदराज का इस तरह नई वेशभू...
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