merri jiwan ki anubhuti
जीवन एक यथार्थ कभी कभी जीवन इतना सुखद लगता है कि आसमान मुठी में महसूस होता है और कभी जब निराशा मन को घेरती है तो पैरों तले की जमीनभी दिखाई नहीं देती , ये पल आते और जाते हैं ठहरते नहीं पर अगर हम दोनों ही परिस्थितियों में नहीं संभले तो गिरने का भय बना ही रहता है ,एक परिस्थिति में उपर से नीचे गिरने का डर और दूसरी स्थिति में निराशा से जीवन जाने का भय जीवन की यही छणभंगुरता कभी हमें शक्ति देती है तो कभी हताशा . ये हमें तय करना है हम किस दिशा में जाएँ .सामाजिक सम्बन्धओ से इन हालातों का सामना भली भांति किया जा सकता है .जब निराशा से मन की डोर टूटने लगे तो रिश्तों की गर्माहट से सँभलने का हौसला भी हासिल हो जाये . और जब आशा के पंखों से मन आसमान में उड़ता हो तब मन की बेकली को रिशतों में साझा करना अधिक सुखद हो जाता है . संभावना और दुश्चिंता के बीच उहापोह से पराजय के उद्घोष से उपजती है विडंबना नंगी हथेली पर उगाती सर...